3 extractive question-and-answer pairs built from How to Cite, published by ejournals.ncert.gov.in. Source-evidenced topics include गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अच्छा विद्यालय, सर्वांगीण विकास, सुरक्षित वातावरण, प्रेरक शिक्षक, अनुकूल शिक्षण-पद्धतियाँ, सतत मूल्यांकन, समग्र विकास. Every answer is a verbatim span of text the source prints, and each row carries the passage it sits in, its offset in that passage, the source quote, the page and the location in the document, so any row can be checked against the original. Question types in the export: 2 relationship, 1 list. 3 of the 3 pairs (100.0%) ask explanatory questions; the remaining 0 are factual or table-based questions. 100.00% of rows pass the corpus quality gate.
This dataset contains three question-and-answer pairs derived from an NCERT publication discussing quality education in India. The questions explore challenges in setting educational standards, the role of quality education in sustainable development, and the components of quality education. Each answer is extracted verbatim from the source, ensuring alignment with the original text. The dataset highlights the multifaceted nature of quality education, emphasizing curriculum, infrastructure, teacher training, and community involvement.
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Use the API URL with your free DD token in notebooks, scripts, and pipelines.
https://www.desidata.in/api/datasets/ejournals-ncert-gov-in-423970107ee9d4c925486b88e61b0bbf/downloadDataset downloads are free. For Python or API downloads, sign in once and create a free DD token; set it as DD_TOKEN or save it in your notebook's secrets. Requests are linked to your account so your download history and counts stay accurate.
# One-time install: pip install desidata
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import desidata
df = desidata.load("ejournals-ncert-gov-in-423970107ee9d4c925486b88e61b0bbf")
df.head()First 3 of 3 rows
| question | answer | context | answer_start | question_type | knowledge_quality_score | source_document | source_quote | source_page | source_location | confidence | validation_status |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| What challenges are highlighted in setting quality standards for education in India? | भारत जैसे विविधतापूर्ण समाज में गुणवत्ता के मानक तय करना एक जटिल कार्य | Published 2026-07-13 यह लेख गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के महत्व और उसे सुनिश्चित करने में एक अच्छे विद्यालय की अनिवार्य भूमिका को स्पष्ट करता है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को केवल ज्ञानार्जन तक सीमित न मानकर उसे एक बहुआयामी अवधारणा के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिसमें पाठ्यक्रम, शिक्षक, अधोसंरचना, संसाधन, मूल्यांकन, प्रबंधन और समुदाय की सहभागिता सम्मिलित है। लेख में यह रेखांकित किया गया है कि शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता का वास्तविक अनुभव विद्यार्थी, अभिभावक और समाज अपने-अपने दृष्टिकोण से करते हैं तथा भारत जैसे विविधतापूर्ण समाज में गुणवत्ता के मानक तय करना एक जटिल कार्य है। एक अच्छा विद्यालय वह होता है जो बच्चों के सर्वांगीण विकास—बौद्धिक, सामाजिक, भावनात्मक, नैतिक और शारीरिक—पर समान रूप से ध्यान देता है। ऐसे विद्यालय में समावेशी और सुरक्षित वातावरण, प्रशिक्षित एवं प्रेरक शिक्षक, आधुनिक संसाधन, अनुकूल शिक्षण-पद्धतियाँ और सतत मूल्यांकन की व्यवस्था होती है। लेख यह भी स्पष्ट करता है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा समाज के समग्र विकास और सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति की कुंजी है। भविष्य के विद्यालय की परिकल्पना करते हुए लेख बताता है कि विद्यालय केवल पढ़ाई-लिखाई का केंद्र नहीं, बल्कि जीवनोपयोगी कौशल, सामाजिक उत्तरदायित्व, पर्यावरणीय चेतना और मानवीय मूल्यों के विकास का मंच होंगे। निष्कर्षतः, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तभी संभव है जब विद्यालय शिक्षा को एक समग्र जीवन-अनुभव बनाएँ और बच्चों को ‘नौकरी योग्य’ के साथ-साथ ‘जीवन योग्य’ नागरिक के रूप में तैयार करें। | 498 | relationship | 0.970 | https://ejournals.ncert.gov.in/index.php/pp/article/view/5331 | Published 2026-07-13 यह लेख गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के महत्व और उसे सुनिश्चित करने में एक अच्छे विद्यालय की अनिवार्य भूमिका को स्पष्ट करता है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को केवल ज्ञानार्जन तक सीमित न मानकर उसे एक बहुआयामी अवधारणा के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिसमें पाठ्यक्रम, शिक्षक, अधोसंरचना, संसाधन, मूल्यांकन, प्रबंधन और समुदाय की सहभागिता सम्मिलित है। लेख में यह रेखांकित किया गया है कि शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता का वास्तविक अनुभव विद्यार्थी, अभिभावक और समाज अपने-अपने दृष्टिकोण से करते हैं तथा भारत जैसे विविधतापूर्ण समाज में गुणवत्ता के मानक तय करना एक जटिल कार्य है। एक अच्छा विद्यालय वह होता | p[0] | 0.700 | valid | |
| What does the article describe as the key to achieving sustainable development goals? | गुणवत्तापूर्ण शिक्षा | Published 2026-07-13 यह लेख गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के महत्व और उसे सुनिश्चित करने में एक अच्छे विद्यालय की अनिवार्य भूमिका को स्पष्ट करता है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को केवल ज्ञानार्जन तक सीमित न मानकर उसे एक बहुआयामी अवधारणा के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिसमें पाठ्यक्रम, शिक्षक, अधोसंरचना, संसाधन, मूल्यांकन, प्रबंधन और समुदाय की सहभागिता सम्मिलित है। लेख में यह रेखांकित किया गया है कि शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता का वास्तविक अनुभव विद्यार्थी, अभिभावक और समाज अपने-अपने दृष्टिकोण से करते हैं तथा भारत जैसे विविधतापूर्ण समाज में गुणवत्ता के मानक तय करना एक जटिल कार्य है। एक अच्छा विद्यालय वह होता है जो बच्चों के सर्वांगीण विकास—बौद्धिक, सामाजिक, भावनात्मक, नैतिक और शारीरिक—पर समान रूप से ध्यान देता है। ऐसे विद्यालय में समावेशी और सुरक्षित वातावरण, प्रशिक्षित एवं प्रेरक शिक्षक, आधुनिक संसाधन, अनुकूल शिक्षण-पद्धतियाँ और सतत मूल्यांकन की व्यवस्था होती है। लेख यह भी स्पष्ट करता है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा समाज के समग्र विकास और सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति की कुंजी है। भविष्य के विद्यालय की परिकल्पना करते हुए लेख बताता है कि विद्यालय केवल पढ़ाई-लिखाई का केंद्र नहीं, बल्कि जीवनोपयोगी कौशल, सामाजिक उत्तरदायित्व, पर्यावरणीय चेतना और मानवीय मूल्यों के विकास का मंच होंगे। निष्कर्षतः, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तभी संभव है जब विद्यालय शिक्षा को एक समग्र जीवन-अनुभव बनाएँ और बच्चों को ‘नौकरी योग्य’ के साथ-साथ ‘जीवन योग्य’ नागरिक के रूप में तैयार करें। | |||||||||
| What aspects are included in the concept of quality education according to the article? | पाठ्यक्रम, शिक्षक, अधोसंरचना, संसाधन, मूल्यांकन, प्रबंधन और समुदाय की सहभागिता | Published 2026-07-13 यह लेख गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के महत्व और उसे सुनिश्चित करने में एक अच्छे विद्यालय की अनिवार्य भूमिका को स्पष्ट करता है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को केवल ज्ञानार्जन तक सीमित न मानकर उसे एक बहुआयामी अवधारणा के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिसमें पाठ्यक्रम, शिक्षक, अधोसंरचना, संसाधन, मूल्यांकन, प्रबंधन और समुदाय की सहभागिता सम्मिलित है। लेख में यह रेखांकित किया गया है कि शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता का वास्तविक अनुभव विद्यार्थी, अभिभावक और समाज अपने-अपने दृष्टिकोण से करते हैं तथा भारत जैसे विविधतापूर्ण समाज में गुणवत्ता के मानक तय करना एक जटिल कार्य है। एक अच्छा विद्यालय वह होता है जो बच्चों के सर्वांगीण विकास—बौद्धिक, सामाजिक, भावनात्मक, नैतिक और शारीरिक—पर समान रूप से ध्यान देता है। ऐसे विद्यालय में समावेशी और सुरक्षित वातावरण, प्रशिक्षित एवं प्रेरक शिक्षक, आधुनिक संसाधन, अनुकूल शिक्षण-पद्धतियाँ और सतत मूल्यांकन की व्यवस्था होती है। लेख यह भी स्पष्ट करता है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा समाज के समग्र विकास और सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति की कुंजी है। भविष्य के विद्यालय की परिकल्पना करते हुए लेख बताता है कि विद्यालय केवल पढ़ाई-लिखाई का केंद्र नहीं, बल्कि जीवनोपयोगी कौशल, सामाजिक उत्तरदायित्व, पर्यावरणीय चेतना और मानवीय मूल्यों के विकास का मंच होंगे। निष्कर्षतः, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तभी संभव है जब विद्यालय शिक्षा को एक समग्र जीवन-अनुभव बनाएँ और बच्चों को ‘नौकरी योग्य’ के साथ-साथ ‘जीवन योग्य’ नागरिक के रूप में तैयार करें। |
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| Published 2026-07-13 यह लेख गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के महत्व और उसे सुनिश्चित करने में एक अच्छे विद्यालय की अनिवार्य भूमिका को स्पष्ट करता है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को केवल ज्ञानार्जन तक सीमित न मानकर उसे एक बहुआयामी अवधारणा के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिसमें पाठ्यक्रम, शिक्षक, अधोसंरचना, संसाधन, मूल्यांकन, प्रबंधन और समुदाय की सहभागिता सम्मिलित है। लेख में यह रेखांकित किया गया है कि शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता का वास्तविक अनुभव विद्यार्थी, अभिभावक और समाज अपने-अपने दृष्टिकोण से करते हैं तथा भारत जैसे विविधतापूर्ण समाज में गुणवत्ता के मानक तय करना एक जटिल कार्य है। एक अच्छा विद्यालय वह होता |
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| Published 2026-07-13 यह लेख गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के महत्व और उसे सुनिश्चित करने में एक अच्छे विद्यालय की अनिवार्य भूमिका को स्पष्ट करता है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को केवल ज्ञानार्जन तक सीमित न मानकर उसे एक बहुआयामी अवधारणा के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिसमें पाठ्यक्रम, शिक्षक, अधोसंरचना, संसाधन, मूल्यांकन, प्रबंधन और समुदाय की सहभागिता सम्मिलित है। लेख में यह रेखांकित किया गया है कि शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता का वास्तविक अनुभव विद्यार्थी, अभिभावक और समाज अपने-अपने दृष्टिकोण से करते हैं तथा भारत जैसे विविधतापूर्ण समाज में गुणवत्ता के मानक तय करना एक जटिल कार्य है। एक अच्छा विद्यालय वह होता |
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