| What aspect of detachment is highlighted in Indian philosophy? | भोग में लिप्ति सेे निवृत्ति की बात करतीी हैै | अन्वेषिका ISSN 0974-7702 खंड 11, अंक 1, जनवरी-अप्रैल, 2025 दुनिया में ज्ात हर तरह केे उपयोगीी और आकर्षक उतपादनों और निर्माणों सेे दुनिया की ज्ात लगभग सभीी सभयताओं को परिचित भीी कराया और उपलब्ध भीी कराया (सुनदरलैंड, 1928, पृृ. 201-202)। हालाँकि उपनिषदों, बौद्ध और जैैन मतों सेे निवृत्ति की गूँज निकलतीी रहीी (दिनकर, 1956, पृृ. 154), जो हमारीी दार्शनिक परमपरा को एक विशिष्ट गहराई प्रदान करतीी हुई हमें आध्यात्मिक चिनतन केे शिखर पर लेे जातीी हैै। (टिपपणीी 5) लेकिन यह निवृत्ति भौतिक उपलब्धिियों सेे निवृत्ति नहीं बल्कि भोग में लिप्ति सेे निवृत्ति की बात करतीी हैै, तयाग की भावना केे साथ भोग करनेे की बात करतीी हैै। (टिपपणीी 6) गीीता में तो कृष्णृष्ण सारेे भ्रम यह कह दूर कर देेतेे हैं कि विरक्ति कर्मफल की इचछा सेे करो, कर्म सेे नहीं (भगवद्गीीता, 2018, 2.47)। निवृत्ति और प्रवृत्ति का बड़ेे हीी सहज ढंग सेे समन्वय कर वेवे उद्यम हेेतु हीी तो प्रेेरित करतेे हैं (राधाकृष्णृष्णन,1923, पृृ. 569)। उद्यम सेे हीी कार्य सिद्ध होतेे हैं (हितोपदेश, 1894, प्रस्ताविका, श्ोक 36), कर्म की कुशलता हीी योग हैै (भगवद्गीीता, 2018, 2.50), जैैसेे संदेश भारतीीय चेेतना में प्ाचीीन काल सेे हीी वयाप्त होतेे रहेे। परिणाम यह रहा कि अपनीी रुचि, क्षमता केे अनुरूप वरण किए गए लौकिक या आध्यात्मिक ज्ान केे विभिनन क्षेत्रोंों (भगवद्गीीता, 2018, 4.13; मुकर्जीी, 1947, पृृ. | 516 | definition | 1.000 | 154), जो हमारीी दार्शनिक परमपरा को एक विशिष्ट गहराई प्रदान करतीी हुई हमें आध्यात्मिक चिनतन केे शिखर पर लेे जातीी हैै। (टिपपणीी 5) लेकिन यह निवृत्ति भौतिक उपलब्धिियों सेे निवृत्ति नहीं बल्कि भोग में लिप्ति सेे निवृत्ति की बात करतीी हैै, तयाग की भावना केे साथ भोग करनेे की बात करतीी हैै। (टिपपणीी 6) गीीता में तो कृष्णृष्ण सारेे भ्रम यह कह दूर कर देेतेे हैं कि विरक्ति कर्मफल की इचछा सेे करो, कर्म सेे नहीं (भगवद्गीीता, 2018, 2.47)। निवृत्ति और प्रवृत्ति का बड़ेे हीी सहज ढंग सेे समन्वय कर वेवे उद्यम हेेतु हीी तो प्रेेरित करतेे हैं (राधाकृष्णृष्णन,1923, पृृ. | 23 | page=23,block=1 | 0.700 | valid |
| व्यक्तित्व विकास का तात्पर्य किस प्रक्रिया से है? | व्यक्तित्व को गढ़नेे व सँवारनेे की प्रक्रिया | व्यक्ति का व्यक्तित्व हीी हैै, जिससेे लोग किसीी को जीवनपर्यनत हीी नहीं अपितु जीवन केे बाद भीी समरण करतेे हैं। जीवन में सममान, अपमान, सफलता, असफलता सब कुछ व्यक्तित्व पर हीी निर्भर हैै। परिश्रम सेे डॉकटर, इंजीनियर, वैैज्ञानिक, कलाकार कुछ भीी बना जा सकता हैै तथा धन भीी कमाया जा सकता हैै, परनतु यदि व्यक्तित्व दुर्गुणों सेे भरा हो तो प्ाप्त की गई सभीी उपलब्धिियाँ वयर्थ हैं। ‘व्यक्तित्व विकास’ सेे तात्पर्य व्यक्तित्व को गढ़नेे व सँवारनेे की प्रक्रिया सेे हैै; सामानय तौर पर जिस तरह सेे व्यक्तित्व का विकास होता हैै, उसमें अनगढ़ता अधिक होतीी हैै। इस अनगढ़ता को सुगढ़ता में बदलनेे की प्रक्रिया व्यक्तित्व विकास केे अंतर्गत आतीी हैै। व्यक्तित्व एक ऐसा तंत्र हैै, जिसमें मानसिक या मनोवैैज्ञानिक तथा शारीीरिक दोनों हीी पक्ष होतेे हैं। यह तंत्र ऐसेे तत्वों का एक गठन होता हैै, जो आपस में अन्तःक्रिया करतेे हैं। इस तंत्र केे मुखय तत्व शीलगुण, संवेवेग, चरित्र, अभिप्रेेरक आदि हैं, जो सभीी मानसिक गुण हैं परनतु इन सबका आधार शारीीरिक अर्थात् व्यक्ति की ग्रन्थीीय प्रक्रियाएँ एवं तंत्रिकीय प्रक्रियाएँ हैं। | 404 | definition | 1.000 | व्यक्ति का व्यक्तित्व हीी हैै, जिससेे लोग किसीी को जीवनपर्यनत हीी नहीं अपितु जीवन केे बाद भीी समरण करतेे हैं। जीवन में सममान, अपमान, सफलता, असफलता सब कुछ व्यक्तित्व पर हीी निर्भर हैै। परिश्रम सेे डॉकटर, इंजीनियर, वैैज्ञानिक, कलाकार कुछ भीी बना जा सकता हैै तथा धन भीी कमाया जा सकता हैै, परनतु यदि व्यक्तित्व दुर्गुणों सेे भरा हो तो प्ाप्त की गई सभीी उपलब्धिियाँ वयर्थ हैं। ‘व्यक्तित्व विकास’ सेे तात्पर्य व्यक्तित्व को गढ़नेे व सँवारनेे की प्रक्रिया सेे हैै; सामानय तौर पर जिस तरह सेे व्यक्तित्व का विकास होता हैै, उसमें अनगढ़ता अधिक होतीी हैै। इस अनगढ़ता को सुगढ़ता में बदलनेे की प्रक्रिया व्यक्तित्व |
| बौनापन किस प्रकार से परिभाषित किया गया है? | एक चिकित्सीीय रूप सेे परिभाषित शबद | आम बोलचाल की भाषा में हम औसत सेे कम ऊँचाई वालेे किसीी भीी व्यक्ति को बौना कह देेतेे हैं। कई बार तो लम्बेे-लम्बेे लोगों केे बीीच बैैठेे औसत ऊँचाई वालेे इंसान को भीी बौनेेपन का तमगा देे दिया जाता हैै। लेकिन बौनापन वास्तव में एक चिकित्सीीय रूप सेे परिभाषित शबद हैै। यहीी नहीं, भारत समेेत अनय कई देशों में इसेे दिवयांगता की श्रेेणीी में भीी रखा जाता हैै। इस आलेेख में हम बौनेेपन की एक दिवयांगता केे रूप में वयाखया कर रहेे हैं। | 223 | definition | 1.000 | आम बोलचाल की भाषा में हम औसत सेे कम ऊँचाई वालेे किसीी भीी व्यक्ति को बौना कह देेतेे हैं। कई बार तो लम्बेे-लम्बेे लोगों केे बीीच बैैठेे औसत ऊँचाई वालेे इंसान को भीी बौनेेपन का तमगा देे दिया जाता हैै। लेकिन बौनापन वास्तव में एक चिकित्सीीय रूप सेे परिभाषित शबद हैै। यहीी नहीं, भारत समेेत अनय कई देशों में इसेे दिवयांगता की श्रेेणीी में भीी रखा जाता हैै। इस आलेेख में हम बौनेेपन की एक दिवयांगता केे रूप में वयाखया कर रहेे हैं। | 57 | page=57,block=8 | 0.700 | valid |
| आंकलन को शिक्षण और अधिगम की प्रक्रिया का कौन सा हिस्सा माना जाता है? | एक अभिनन अंग केे रूप में | शिक्षण की प्रक्रिया का ध्येेय अधिगम को बेेहतर करना हैै और छात्रोंों नेे कया सीीखा हैै या वेवे अपनेे अधिगम में कहाँ हैं; का मापन आंकलन द्ारा किया जाता हैै। इसलिए, आंकलन शिक्षण और अधिगम की प्रक्रिया केे एक अभिनन अंग केे रूप में जाना जाता हैै। वर्षों सेे, आंकलन नेे कई सवालों केे जवाब दिए हैं, जैैसेे- सीीखनेे केे क्रम में छात्रोंों का धयान कहां केन्द्रित होता हैै? छात्रोंों में अधिगम की प्रक्रिया कैैसेे होतीी हैै? किसीी कार्य को करनेे केे लिए छात्रोंों केे गुणवत्ा का सतर कया हैै? एक शिक्षक कैैसेे समझता हैै कि छात्र नेे कया सीीखा हैै? छात्र अधिगम केे लिए किन कारकों सेे अभिप्रेेरित होतेे हैं? इन महत्त्वपूर्ण प्रश्ों केे उत्तर समझनेे केे लिए आंकलन एक प्रभावीी उपकरण केे रूप में देेखा जाता हैै। इसेे छात्रोंों केे अधिगम और उपलब्धिि को बढ़ाानेे की प्रक्रिया केे रूप में भीी माना जाता हैै। हालाँकि, स्कूल में सबसेे अधिक संचालित किया जानेे वाला आंकलन पेेन और पेेपर पर की जानेे वालीी परीीक्ा या परीक्षण हैै, जो नियंत्रित परिस्थितियों में एक सत्रांांत या वर्ष केे अंत में छात्रोंों केे प्रदर्शन को मापता हैै और यहीी ग्रेडिंग और विद्यार्थियों की उपलब्धिियों को प्रमाणित करनेे का रूप लेेता हैै। इसेे सामानयतः योगातमक आंकलन कहा जाता हैै। | 201 | definition | 1.000 | शिक्षण की प्रक्रिया का ध्येेय अधिगम को बेेहतर करना हैै और छात्रोंों नेे कया सीीखा हैै या वेवे अपनेे अधिगम में कहाँ हैं; का मापन आंकलन द्ारा किया जाता हैै। इसलिए, आंकलन शिक्षण और अधिगम की प्रक्रिया केे एक अभिनन अंग केे रूप में जाना जाता हैै। वर्षों सेे, आंकलन नेे कई सवालों केे जवाब दिए हैं, जैैसेे- सीीखनेे केे क्रम में छात्रोंों का धयान कहां केन्द्रित होता हैै? छात्रोंों में अधिगम की प्रक्रिया कैैसेे होतीी हैै? किसीी कार्य को करनेे केे लिए छात्रोंों केे गुणवत्ा का सतर कया हैै? एक शिक्षक कैैसेे समझता हैै कि छात्र नेे कया सीीखा हैै? छात्र अधिगम केे लिए किन कारकों सेे अभिप्रेेरित होतेे हैं? इन |
| प्रतिपुष्टि को प्रभावी बनाने के लिए क्या करना जरूरी है? | जो जानकारीी छात्र को दीी जातीी हैै, उसका उपयोग सीीखनेे और प्रदर्शन में | दरअसल प्रभावशालीी प्रतिपुष्टि प्रदान करना बहुत कठिन हैै। यह कठिनाई इस कारण सेे हैै कि शिक्षकों द्ारा दीी गई जानकारीी छात्रोंों केे व्यक्तिगत प्रसंग में सहायक नहीं होतीी हैै। एक शिक्षक नेे एक छात्र द्ारा प्रसतुत गृृहकार्य पर लिखा, “आपको अधिक व्यवस्थित होना चाहिए।” यह जानकारीी सटीीक हैै, लेकिन छात्र केे लिए यह सहायक नहीं हैै। यह जमा किए गए काम में कमीी पर केंद्रित हैै। लेकिन प्रतिपुष्टि को रचनातमक रूप सेे कार्य में लानेे केे लिए, जो जानकारीी छात्र को दीी जातीी हैै, उसका उपयोग सीीखनेे और प्रदर्शन में | 432 | definition | 1.000 | दरअसल प्रभावशालीी प्रतिपुष्टि प्रदान करना बहुत कठिन हैै। यह कठिनाई इस कारण सेे हैै कि शिक्षकों द्ारा दीी गई जानकारीी छात्रोंों केे व्यक्तिगत प्रसंग में सहायक नहीं होतीी हैै। एक शिक्षक नेे एक छात्र द्ारा प्रसतुत गृृहकार्य पर लिखा, “आपको अधिक व्यवस्थित होना चाहिए।” यह जानकारीी सटीीक हैै, लेकिन छात्र केे लिए यह सहायक नहीं हैै। यह जमा किए गए काम में कमीी पर केंद्रित हैै। लेकिन प्रतिपुष्टि को रचनातमक रूप सेे कार्य में लानेे केे लिए, जो जानकारीी छात्र को दीी जातीी हैै, उसका उपयोग सीीखनेे और प्रदर्शन में | 76 | page=76,block=11 | 0.700 | valid |
| What does portfolio assessment emphasize from an educational perspective? | छात्रोंों केे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन को कुछ समय केे दौरान प्रदर्शित करनेे सेे संबंधित होता हैै। | अन्वेषिका ISSN 0974-7702 खंड 11, अंक 1, जनवरी-अप्रैल, 2025 का मतलब वहनीीय कागजात, कलाकृतियाँ और दस्तावेवेज़ों को सामूहिक रूप सेे रखना होता हैै। शैक्षिक दृष्टिकोण सेे, पोर्टफोलियो आंकलन छात्रोंों केे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन को कुछ समय केे दौरान प्रदर्शित करनेे सेे संबंधित होता हैै। इनका उपयोग विभिनन शैक्षिक सतरों पर विभिनन पहलुओं पर धयान केंद्रित करनेे केे लिए किया जा सकता हैै; किंडरगार्टन में, पोर्टफोलियो लेेखन में उन महत्त्वपूर्ण कौशलों को शामिल किया जा सकता हैै, जो बच्चेे सीीखतेे हैं, जैैसेे कि शब्दावलीी का निर्माण और चित्राातमक प्रस्तुति केे साथ सरल वाकय-निर्माण। माध्यमिक सतर पर, पोर्टफोलियो में विज्ान प्रदर्शनीी में मॉडल का प्रतिवेवेदन और क्षणचित्र, स्कूल साहित्यिक महोत्सव में लिखीी गई रचनातमक कविता, शैक्षणिक यात्राा का अनुभव आदि शामिल हो सकतेे हैं। छात्रोंों को अधययन-अवधि केे दौरान समीीक्ा और चिंतन केे लिए नोट्स, फीडबैैक, सुधार और गृृहकार्य रखनेे केे लिए प्ोत्साहित किया जा सकता हैै। पोर्टफोलियो मूलयांकन की प्रक्रिया में संग्रहण, चयन, स्व-आंकलन, चिंतनशीलता और विलंबित मूलयांकन शामिल होता हैै, जो विभिनन स्ोतों सेे प्ाप्त प्रतिपुष्टि द्ारा परिपूर्ण होता हैै, जैैसा कि निम्नलिखित चित्र में दिखाया गया हैै। | 185 | definition | 1.000 | अन्वेषिका ISSN 0974-7702 खंड 11, अंक 1, जनवरी-अप्रैल, 2025 का मतलब वहनीीय कागजात, कलाकृतियाँ और दस्तावेवेज़ों को सामूहिक रूप सेे रखना होता हैै। शैक्षिक दृष्टिकोण सेे, पोर्टफोलियो आंकलन छात्रोंों केे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन को कुछ समय केे दौरान प्रदर्शित करनेे सेे संबंधित होता हैै। इनका उपयोग विभिनन शैक्षिक सतरों पर विभिनन पहलुओं पर धयान केंद्रित करनेे केे लिए किया जा सकता हैै; किंडरगार्टन में, पोर्टफोलियो लेेखन में उन महत्त्वपूर्ण कौशलों को शामिल किया जा सकता हैै, जो बच्चेे सीीखतेे हैं, जैैसेे कि शब्दावलीी का निर्माण और चित्राातमक प्रस्तुति केे साथ सरल वाकय-निर्माण। माध्यमिक सतर पर, पोर्टफोलियो |
| छोटा व्हाइटबोर्ड किसका आधुनिक संस्करण माना जाता है? | वर्तमान समय की स्लेेटों का नवीीनतम रूप | अन्वेषिका ISSN 0974-7702 खंड 11, अंक 1, जनवरी-अप्रैल, 2025 छोटा वहाइटबोर्ड विलियम (2011) छोटा वहाइटबोर्ड को वर्तमान समय की स्लेेटों का नवीीनतम रूप मानतेे हैं। यह एक शक्तिशालीी उपकरण हैै, कयोंकि इसकी सहायता सेे वह पूरीी कक्ा सेे किसीी प्रश्न का उत्तर प्ाप्त कर सकतेे हैं, जैैसेे प्रश्न हो सकता हैै: बिंदु (अ, ब ), बिंदु (6, 2) और (4, 5) सेे समान दूरीी पर हैै, तो अ और ब केे बीीच कया संबंध हैै या लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका कया हैै? छोटेे वहाइटबोर्ड का उपयोग हर छात्र को शामिल होनेे का अवसर देेता हैै। शिक्षक को तात्कालिक प्रतिक्रियाएं मिलतीी हैं और प्रत्येेक छात्र की सामग्री की समझ का आंकलन हो जाता हैै। इसकेे अलावा, शिक्षक कक्ा में वितरित करनेे केे लिए पूर्व-मुद्रित प्रश्न-पत्र भीी रख सकतेे हैं। यह अधिक लचीला होता हैै, इसलिए जब इतिहास पढ़ााया जा रहा हो, तो वेवे देश केे नक़्शेे का उपयोग कर सकतेे हैं और जब भूगोल पढ़ााया जा रहा हो, तो एक अनामांकित मानचित्र का प्रयोग किया जा सकता हैै। | 108 | definition | 1.000 | अन्वेषिका ISSN 0974-7702 खंड 11, अंक 1, जनवरी-अप्रैल, 2025 छोटा वहाइटबोर्ड विलियम (2011) छोटा वहाइटबोर्ड को वर्तमान समय की स्लेेटों का नवीीनतम रूप मानतेे हैं। यह एक शक्तिशालीी उपकरण हैै, कयोंकि इसकी सहायता सेे वह पूरीी कक्ा सेे किसीी प्रश्न का उत्तर प्ाप्त कर सकतेे हैं, जैैसेे प्रश्न हो सकता हैै: बिंदु (अ, ब ), बिंदु (6, 2) और (4, 5) सेे समान दूरीी पर हैै, तो अ और ब केे बीीच कया संबंध हैै या लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका कया हैै? छोटेे वहाइटबोर्ड का उपयोग हर छात्र को शामिल होनेे का अवसर देेता हैै। शिक्षक को तात्कालिक प्रतिक्रियाएं मिलतीी हैं और प्रत्येेक छात्र की सामग्री की समझ का आंकलन हो |
| भारत में शिक्षा को किस रूप में देखा गया है? | शिक्ा को एक अनिवार्य मानव कौशल केे रूप में माना गया हैै। | भारत आदिकाल सेे गुरु-शिष्य परंपरा का देश रहा हैै। यहाँ की संस्कृति और सामाजिक संरचना में शिक्ा को एक अनिवार्य मानव कौशल केे रूप में माना गया हैै। हमारेे वेवेद, वेवेदांग जो एक समृद्ध बौद्धिकता और चिंतन पर आधारित शास्त्र हैं; हमेशा सेे हीी शिक्षण-अधिगम केे विषय में हमारा मार्गदर्शन करतेे आए हैं। हमारीी समृद्ध और समपनन ज्ान परंपरा को आम जन तक पहुँचानेे में गुरुओं का योगदान सर्वाधिक रहा हैै। परंतु विभिनन कालखण्डों की विकास यात्राा केे दौरान ऐसा बहुत कुछ घटा, जिसनेे भारत देश में गुरुओं का स्थाान और भूमिका को अत्यधिक सीमित किया और हम अपनीी समृद्ध ज्ान परंपरा सेे दूर होतेे चलेे गए। वर्तमान समय में अपनीी समृद्ध ज्ान परमपराओं केे साथ फिर सेे एक जुड़ाव की यात्राा का आरंभ हुआ हैै। इस यात्राा केे क्रम में राष्ट्रीय शिक्ा नीति, 2020 का योगदान | 89 | definition | 1.000 | भारत आदिकाल सेे गुरु-शिष्य परंपरा का देश रहा हैै। यहाँ की संस्कृति और सामाजिक संरचना में शिक्ा को एक अनिवार्य मानव कौशल केे रूप में माना गया हैै। हमारेे वेवेद, वेवेदांग जो एक समृद्ध बौद्धिकता और चिंतन पर आधारित शास्त्र हैं; हमेशा सेे हीी शिक्षण-अधिगम केे विषय में हमारा मार्गदर्शन करतेे आए हैं। हमारीी समृद्ध और समपनन ज्ान परंपरा को आम जन तक पहुँचानेे में गुरुओं का योगदान सर्वाधिक रहा हैै। परंतु विभिनन कालखण्डों की विकास यात्राा केे दौरान ऐसा बहुत कुछ घटा, जिसनेे भारत देश में गुरुओं का स्थाान और भूमिका को अत्यधिक सीमित किया और हम अपनीी समृद्ध ज्ान परंपरा सेे दूर होतेे चलेे गए। वर्तमान समय में |
| What was the teaching point for oral work involving the use of 'I want'? | ‘चाहना’ प्रेेरणार्थक क्रिया केे साथ (Use of ‘I want’ with a causative verb) | अन्वेषिका ISSN 0974-7702 खंड 11, अंक 1, जनवरी-अप्रैल, 2025 में मौजूद हैं। अभयास भाग में शामिल थेे: शबद पढ़ोो, समानार्थी शबद, विलोम शबद, प्रश्न-उत्तर, वाकय बनाना तथा ‘किसनेे कहा?’ (Who said?)। मौखिक कार्य का शिक्षण बिंदु ‘चाहना’ प्रेेरणार्थक क्रिया केे साथ (Use of ‘I want’ with a causative verb) था। अधयाय केे अंत में शिक्षकों को निर्देश दिया गया था कि वेवे विद्यार्थियों केे चार भाषा कौशलों (सुनना, बोलना, पढ़ना और लिखना) और संचार कौशल को विकसित करनेे केे लिए कार्य करें। उदाहरण: “अब अधयापक छात्रोंों को पात्र बनाकर उनसेे पाठ केे अनुसार वार्तालाप करवाएगा।” (आदेश, पाठ-6, पृष्ठ संखया-30) छात्रोंों को ‘चाहना’ शबद का अधिक प्रयोग कराएँ ताकि वेवे इसेे सरल वाकयों में सहीी ढंग सेे उपयोग कर सकें। गृृहकार्य में हिंदीी वाकयों का मिज़ोज़ो भाषा में अनुवाद करनेे का कार्य दिया गया था। मौखिक कार्य का शिक्षण बिंदु ‘साधारण भूतकाल’ (Simple Past Tense) एवं ‘आसनन भूतकाल’ (Recent Past Tense, जो अंग्रेज़ीी भाषा केे Past Indefinite Tense केे समान हैै) हैं। शिक्षकों को आदेश दिया गया हैै कि वेवे साधारण भूतकाल और ‘आसनन भूतकाल’ केे प्रयोग को अधिक उदाहरणों केे साथ समझाएँ। | 220 | definition | 1.000 | अन्वेषिका ISSN 0974-7702 खंड 11, अंक 1, जनवरी-अप्रैल, 2025 में मौजूद हैं। अभयास भाग में शामिल थेे: शबद पढ़ोो, समानार्थी शबद, विलोम शबद, प्रश्न-उत्तर, वाकय बनाना तथा ‘किसनेे कहा?’ (Who said?)। मौखिक कार्य का शिक्षण बिंदु ‘चाहना’ प्रेेरणार्थक क्रिया केे साथ (Use of ‘I want’ with a causative verb) था। अधयाय केे अंत में शिक्षकों को निर्देश दिया गया था कि वेवे विद्यार्थियों केे चार भाषा कौशलों (सुनना, बोलना, पढ़ना और लिखना) और संचार कौशल को विकसित करनेे केे लिए कार्य करें। उदाहरण: “अब अधयापक छात्रोंों को पात्र बनाकर उनसेे पाठ केे अनुसार वार्तालाप करवाएगा।” (आदेश, पाठ-6, पृष्ठ संखया-30) छात्रोंों |
| What was the focus of oral work for teaching the simple past tense? | ‘गया/गयीी/गयेे/गयीं’ (साधारण भूतकाल - Simple Past Tense) | अन्वेषिका ISSN 0974-7702 खंड 11, अंक 1, जनवरी-अप्रैल, 2025 चित्र सं० 1: ‘हम ननहें नहें बच्चेे हैं’ पाठ सेे उद्धृत ब्चों का भारतीयय ध्वज पकड़ेे हुए चित्र यह अधयाय भीी राष्ट्र प्रेेम (देशभक्ति) सेे संबंधित हैै। शबदार्थ अनुभाग में कठिन शबदों केे अर्थ हिंदीी और अंग्रेज़ीी दोनों में दिए गए हैं। शिक्षकों केे निर्देश और गृृह कार्य सभीी अधयायों में मौजूद हैं। अभयास भाग में प्रश्न-उत्तर, बहुविकल्पीीय प्रश्न, रिक्त स्थाानों की पूर्ति, कठिन शबदों का अभयास, समानार्थी शबद, विलोम शबद, वाकय बनाना, आदि शामिल हैं। मौखिक कार्य का शिक्षण बिंदु ‘गया/गयीी/गयेे/गयीं’ (साधारण भूतकाल - Simple Past Tense) तथा ‘गा/गीी/गेे’ (shall और will) हैं। अधयाय केे अंत में शिक्षकों को निर्देश दिया गया था कि वेवे छात्रोंों को अधिक अभयास कराएँ ताकि वेवे ‘गया/गयीी/गयेे/गयीं’ एवं ‘गा/गीी/गेे’ (साधारण भविष्यष्यत काल shall और will) का सहीी प्रयोग कर सकें। अधयाय 15 केे अभयास खंड में एक मुद्रण त्रुटि थीी, जहाँ ‘निम्नलिखित’ शबद गलत तरीीकेे सेे लिखा गया था। अधयाय 9 अधयाय 9 ‘एकता में बल’ (Power of Unity) नामक शीर्षक सेे हैै। यह पाठ्यपुसतक की पहलीी कहानीी हैै। कहानीी एक वृद्ध व्यक्ति लियानवुंगा और उसकेे चार बेेटों केे बारेे में हैै। कहानीी और चित्र मिज़ोज़ो संदर्भ (Mizo context) में प्रसतुत किए गए हैं। कहानीी केे पहलेे चित्र में लियानवुंगा अपनेे चार बेेटों केे साथ हैै। दूसरेे चित्र में एक लड़का लकड़ियों को तोड़नेे की क्रिया में दिखाया गया हैै। एक वाकय वयाकरण की दृष्टि सेे गलत हैै: |